विस्तृत उत्तर
अत्यंत विवादित — दोनों पक्ष:
अनुमत (वैदिक प्रमाण): अथर्ववेद 11.5.18 — कन्या ब्रह्मचर्य (वेदाध्ययन) = उपनयन संस्कार। हारीत धर्मसूत्र — ब्रह्मवादिनी स्त्रियां = उपनयन+अग्निहोत्र+वेदाध्ययन अधिकार। वैदिक काल = स्त्री उपनयन प्रचलित।
वर्जित (मध्यकालीन): मनुस्मृति/याज्ञवल्क्य — स्त्री उपनयन = विवाह तुल्य (प्रतीकात्मक)। बाद की स्मृतियां = स्पष्ट निषेध। अधिकांश वर्तमान परंपराएं = स्त्री जनेऊ नहीं।
वर्तमान: आर्य समाज = स्त्री उपनयन अनुमत (कुछ शाखा)। अधिकांश परंपरागत = अनुमत नहीं।
संतुलित: वैदिक काल = अधिकार था; मध्यकाल = प्रतिबंध; आधुनिक = पुनर्विचार हो रहा। 'वेद = परम प्रमाण; स्मृति = कालानुसार' — यह शास्त्रीय सिद्धांत।




