विस्तृत उत्तर
अत्यंत पूछा जाने वाला प्रश्न — विस्तृत उत्तर:
वर्जित (परंपरागत): मासिक धर्म = अशुद्धि काल; पूजा/जप/मंदिर/रसोई वर्जित। 4-5 दिन 'अछूत।' शारीरिक विश्राम हेतु बनाया गया (मूल उद्देश्य)।
अनुमत (आधुनिक/प्रगतिशील): मासिक = प्राकृतिक; अशुद्धि नहीं। कामाख्या = मासिक पवित्र (देवी रजस्वला)। मानसिक जप = सदैव अनुमत (कोई परंपरा में भी); ईश्वर स्मरण कभी वर्जित नहीं।
संतुलित व्यावहारिक
- ▸मानसिक जप (मन में) = बिल्कुल करें ✅
- ▸ध्यान/प्राणायाम = करें ✅
- ▸ऊंचे स्वर जप = कुल परंपरा अनुसार
- ▸मूर्ति स्पर्श/मंदिर गर्भगृह = मंदिर नियम अनुसार
- ▸पूजा सामग्री = दूसरों से कराएं (4-5 दिन)
अपराधबोध न रखें। ईश्वर ने शरीर बनाया; प्राकृतिक प्रक्रिया = पाप नहीं। भक्ति = हृदय से; शरीर = माध्यम।





