विस्तृत उत्तर
विवादित — दोनों पक्ष:
परंपरागत (कुछ): संध्या वंदन = यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारक; महिलाओं = जनेऊ नहीं → संध्या वर्जित।
वैदिक/प्रगतिशील: अथर्ववेद — कन्या ब्रह्मचर्य अधिकार; 25 ऋषिकाएं (Q1060)। गायत्री मंत्र = संध्या का मूल; महिलाएं गायत्री जप सकती → संध्या भी। आर्य समाज/चिन्मय मिशन = महिलाओं को अनुमत।
व्यावहारिक: पूर्ण वैदिक संध्या (आचमन+प्राणायाम+गायत्री+अर्घ्य) = कुल परंपरा अनुसार। गायत्री जप + सूर्य अर्घ्य = सार्वभौमिक; कोई वर्जना नहीं। संध्या = ईश्वर स्मरण; किसी का अधिकार छीनना = अधर्म।