विस्तृत उत्तर
महालक्ष्मी व्रत = भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से 16 दिन; लक्ष्मी कृपा + समृद्धि।
विधि: 16 दिन व्रत (एक समय भोजन या फलाहार)। प्रतिदिन लक्ष्मी पूजा (16 धागे की डोरी — 16 गांठ)। सोलह श्रृंगार से लक्ष्मी सजाएं। महालक्ष्मी कथा सुनें। 16वें दिन उद्यापन = ब्राह्मण/सुहागन भोज + दान।
प्रसाद: पूरी + नैवेद्य। विशेष: महाराष्ट्र में अत्यंत लोकप्रिय (गौरी-गणपति + महालक्ष्मी)।
लाभ: धन-समृद्धि, सौभाग्य, पारिवारिक सुख, ऋण मुक्ति। लक्ष्मी = स्वच्छता+दान+धैर्य पसंद।
