विस्तृत उत्तर
हाँ — वैदिक काल में महिलाओं को वेद अधिकार था। शास्त्रीय प्रमाण
- 125 ऋषिकाएं ऋग्वेद में — 402 ऋषियों में 25 महिलाएं (अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, विश्ववारा, सरस्वती, सूर्या, सावित्री, अदिति आदि)। जब वेद मंत्र की 'द्रष्टा' (रचयिता) स्त्रियां हैं तो पढ़ने का अधिकार कैसे नहीं?
- 1गार्गी-याज्ञवल्क्य शास्त्रार्थ — बृहदारण्यक उपनिषद में गार्गी ने ऋषि याज्ञवल्क्य से ब्रह्मविद्या शास्त्रार्थ किया = वेद ज्ञान का प्रमाण।
- 1मैत्रेयी — याज्ञवल्क्य पत्नी; ब्रह्मविद्या चुनी धन के बजाय।
- 1तैत्तिरीय ब्राह्मण — सीता-सावित्री ऋषिका को सोम ने तीन वेद दिए।
- 1अथर्ववेद — कन्या ब्रह्मचर्य (वेदाध्ययन) पूर्ण कर विवाह योग्य = स्त्री शिक्षा अधिकार।
- 1पाणिनि अष्टाध्यायी — महिलाएं गुरुकुल जातीं; वेद शाखाएं पढ़तीं।
मध्यकालीन प्रतिबंध: बाद के कुछ ग्रंथों (स्मृतियों) में प्रतिबंध आया — यह कालानुसार सामाजिक बदलाव; मूल वैदिक परंपरा = अधिकार था।
आज: गायत्री मंत्र सहित सभी वैदिक मंत्र महिलाएं पढ़ सकती हैं। अनेक विद्वान/संस्थाएं (आर्य समाज, चिन्मय मिशन आदि) इसका समर्थन करते हैं।





