विस्तृत उत्तर
हरतालिका तीज = भाद्रपद शुक्ल तृतीया; निर्जल व्रत (बिना जल); पार्वती व्रत।
कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या की → सखियों ने पार्वती को 'हरत' (अपहरण) कर वन ले गईं ताकि पिता विष्णु से विवाह न करा सकें → पार्वती ने शिव वरण → 'हरतालिका' = सखी द्वारा हरण। शिव प्रसन्न → पार्वती को अखंड सौभाग्य वरदान।
पति आयु: शिव = महामृत्युंजय (मृत्यु विजेता); पार्वती ने शिव पूजा से अखंड सौभाग्य पाया → सुहागन स्त्री इसी भाव से व्रत = शिव कृपा = पति रक्षा। निर्जल = सबसे कठोर तप = सबसे अधिक पुण्य।
विधि: निर्जल व्रत, शिव-पार्वती बालू/मिट्टी मूर्ति, षोडशोपचार पूजा, कथा, रात्रि जागरण। अगले दिन प्रातः पारण।




