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आयु प्रश्नोत्तरी — 12 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित आयु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 12 प्रश्न

लोक

महर्लोक के निवासियों की आयु कितनी होती है?

महर्लोक के निवासियों की आयु एक पूर्ण कल्प (ब्रह्मा का एक दिन = 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्ष) होती है। इतने समय तक वे बिना किसी कष्ट के समाधि में रहते हैं।

महर्लोकआयुकल्प
काल और ब्रह्मा

ब्रह्मा के दिन रात और आयु की गणना कहाँ बताई गई है?

ब्रह्मा के दिन-रात और आयु की गणना लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों में बताई गई है।

ब्रह्मादिन रातआयु
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भागवत सप्ताह क्यों जरूरी है?

कलियुग में मन की चंचलता, रोग, अल्प आयु और दोषों के कारण सात दिन का भागवत श्रवण विशेष रूप से बताया गया है।

कलियुगभागवत सप्ताहआयु
लोक

दशमी श्राद्ध से आयु और यश मिलता है क्या?

हाँ, आयु और यश का फल बताया गया है।

आयुयशश्राद्ध फल
लोक

याज्ञवल्क्य स्मृति में श्राद्ध का फल क्या है?

आयु, धन, संतान, विद्या, स्वर्ग और मोक्ष।

याज्ञवल्क्य स्मृतिश्राद्ध फलआयु
लोक

सप्तमी श्राद्ध से आयु कैसे मिलती है?

प्रसन्न पितर श्राद्धकर्ता को दीर्घायु देते हैं।

आयुसप्तमी श्राद्धपितृ आशीर्वाद
लोक

तृतीया श्राद्ध से आयु बढ़ती है?

श्राद्ध से पितरों द्वारा आयु और बल का आशीर्वाद मिलता है।

आयुश्राद्ध फलयाज्ञवल्क्य स्मृति
श्राद्ध फल

क्या श्राद्ध से लंबी आयु मिलती है?

हाँ, श्राद्ध से लंबी आयु मिलती है। यह श्राद्ध के आठ प्रमुख फलों में से पहला फल है। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार पितर तृप्त और प्रसन्न होकर मनुष्यों को सबसे पहले दीर्घ आयु प्रदान करते हैं। मार्कण्डेय और विष्णु पुराण भी इसी की पुष्टि करते हैं।

आयुदीर्घ जीवनश्राद्ध फल
लोक

श्राद्ध से पितर कौन-कौन से आशीर्वाद देते हैं?

श्राद्ध से पितर आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख, राज्य, स्वास्थ्य और रक्षा का आशीर्वाद देते हैं।

श्राद्ध आशीर्वादपितरआयु
लोक

सत्यलोक में कितने समय तक रहा जा सकता है?

सत्यलोक में 15,480 अरब मानव वर्षों तक रहा जा सकता है — यह ब्रह्मा जी की पूरी आयु के बराबर है। इसीलिए इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं।

सत्यलोकआयु15480 अरब
महिला एवं धर्म

हरतालिका तीज से पति आयु कैसे बढ़ती

भाद्रपद शुक्ल तृतीया; पार्वती ने शिव तपस्या=अखंड सौभाग्य। शिव=महामृत्युंजय=पति रक्षा। निर्जल=कठोर तप=अधिक पुण्य। बालू मूर्ति+षोडशोपचार+रात्रि जागरण।

हरतालिकातीजपति
वैदिक कर्मकांड

संध्या वंदन कितनी उम्र से शुरू करनी चाहिए?

संध्या वंदन: उपनयन संस्कार से। आयु: ब्राह्मण 5-8 वर्ष, क्षत्रिय 6-11, वैश्य 8-12 (मनुस्मृति)। उपनयन दिवस = गायत्री उपदेश = संध्या आरम्भ। वर्तमान: 7-12 वर्ष। बिना उपनयन = ॐ/भगवन्नाम जप कर सकते हैं।

संध्या वंदनउपनयनआयु

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।