विस्तृत उत्तर
महर्लोक के निवासियों की सामान्य आयु एक पूर्ण कल्प (ब्रह्मा का एक दिन, अर्थात् 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्ष) के बराबर होती है। ब्रह्मा के पूरे दिन तक वे बिना किसी भौतिक व्यवधान या शारीरिक कष्ट के भगवान की उपासना और समाधि में लीन रहते हैं। यह आयु स्वर्गलोक के निवासियों से असीम रूप से अधिक है। स्वर्गलोक में पुण्य क्षीण होने पर निवासियों को वापस आना पड़ता है परंतु महर्लोक के निवासी एक पूरे कल्प तक बिना किसी व्यवधान के यहाँ रह सकते हैं। जब नैमित्तिक प्रलय आता है तब संकर्षण की अग्नि के ताप से ये ऋषि महर्लोक छोड़कर जनलोक की ओर जाते हैं और ब्रह्मा की अगली रात्रि समाप्त होने पर पुनः लौट आते हैं।
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