विस्तृत उत्तर
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार श्राद्ध और तर्पण से तृप्त पितर मनुष्य को दीर्घ आयु, श्रेष्ठ संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख और राज्य प्रदान करते हैं। गरुड़ पुराण और धर्मसिन्धु में इस आशीर्वाद को देव-श्रेणियों के अनुसार भी समझाया गया है। वसु-रूप पिता सुप्रजा, शारीरिक बल, ऐहिक सुख और वंश-वृद्धि देते हैं। रुद्र-रूप पितामह धन, उत्तम स्वास्थ्य, तेज और शत्रुओं से अजेय रक्षा देते हैं। आदित्य-रूप प्रपितामह आध्यात्मिक उन्नति, परम विद्या, ज्ञान-प्रकाश और मोक्ष की दिशा में ले जाते हैं।
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