विस्तृत उत्तर
ग्रहण काल में मंत्र जप सर्वोत्तम कर्म है। इस समय का जप सामान्य समय से लाखों-करोड़ों गुना फल देता है।
ग्रहण काल में जपने योग्य मंत्र
1. गायत्री मंत्र (सर्वश्रेष्ठ): 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' — सूर्य और चन्द्र दोनों ग्रहण में।
2. महामृत्युंजय मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।' — अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य।
3. सूर्य ग्रहण विशेष: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।' — सूर्य बीज मंत्र। 'ॐ आदित्याय नमः।'
4. चन्द्र ग्रहण विशेष: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।' — चन्द्र बीज मंत्र। 'ॐ सोमाय नमः।'
5. राहु-केतु शांति: ग्रहण राहु-केतु के कारण होता है, अतः — 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।' 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।'
6. विष्णु मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।' — सर्वकालिक शुभ मंत्र।
7. इष्ट देवता मंत्र: अपने इष्ट देवता (शिव, विष्णु, दुर्गा, हनुमान आदि) का मंत्र भी ग्रहण काल में जप सकते हैं।
जप नियम: शुद्ध आसन पर पूर्व/उत्तर दिशा में मुख करके बैठें। माला (तुलसी/रुद्राक्ष) से जप। यथाशक्ति अधिक से अधिक जप करें। ग्रहण के पूरे समय जप जारी रखें।





