विस्तृत उत्तर
संध्या वंदन का समय विधि के विस्तार पर निर्भर करता है:
विस्तृत संध्या (आदर्श): 30-45 मिनट
आचमन → प्राणायाम → मार्जन → अघमर्षण → गायत्री जप (108+ बार) → सूर्य उपस्थान → प्रार्थना → विसर्जन। तीनों संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं)।
मध्यम संध्या: 15-20 मिनट
आचमन → प्राणायाम → गायत्री 28 बार जप → सूर्य अर्घ्य → प्रार्थना।
सरलतम/न्यूनतम संध्या: 5-10 मिनट
स्नान/हाथ-मुख धोना → आचमन (3 बार जल) → 3 बार प्राणायाम → गायत्री 10 बार जप → नमस्कार। यह 'आपद्धर्म' (आपत्काल) में न्यूनतम।
शास्त्रीय दृष्टि
- ▸मनुस्मृति: 'प्रातः संध्या = सूर्योदय तक खड़े रहकर।' (अर्थात तारे दिखने से सूर्योदय तक = लगभग 1 घण्टा — यह आदर्श किन्तु अत्यंत कठोर।)
- ▸व्यावहारिक: जितना समय दे सकें, श्रद्धापूर्वक दें। 10 मिनट नियमित > 1 घण्टा अनियमित।
गायत्री जप संख्या
- ▸आदर्श: 1008 बार (10 माला)।
- ▸उत्तम: 108 बार (1 माला)।
- ▸मध्यम: 28 बार।
- ▸न्यूनतम: 10 बार।
- ▸आपत्काल: 3 बार भी पर्याप्त।





