विस्तृत उत्तर
जल अर्पण की सरल विधि धर्म सिंधु में वर्णित है:
जल अर्पण के तीन रूप
1पाद्य (चरण जल)
हे भगवान, आपके चरणों को धोने के लिए जल अर्पित है।
> 'ॐ [देव नाम] पाद्यं समर्पयामि' — देवता के चरणों में जल छोड़ें।
2अर्घ्य (सम्मान जल)
हे भगवान, आपके हाथ धोने के लिए जल।
> 'ॐ [देव नाम] अर्घ्यं समर्पयामि'
3आचमन (पेय जल)
हे भगवान, पेय जल।
> 'ॐ [देव नाम] आचमनीयं समर्पयामि'
विधि
- 1तांबे के पात्र या आचमनी में जल
- 2दाहिने हाथ से या दोनों हाथों से
- 3भगवान के पास जल पात्र में धीरे से छोड़ें
- 4मंत्र उच्चारण के साथ
सूर्य अर्घ्य
प्रातः तांबे के लोटे से पतली धारा — सूर्य के दर्शन करते हुए — गायत्री मंत्र।
महत्व
जल = जीवन। देवता को जीवन का सबसे मूल तत्व अर्पित करना।





