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पूजा विधि📜 धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, नित्यकर्म पूजा प्रकाश1 मिनट पठन

पूजा में जल कैसे अर्पित करें?

संक्षिप्त उत्तर

जल अर्पण: तीन रूप — पाद्य (चरण धुलाई), अर्घ्य (हाथ धुलाई), आचमन (पेय)। विधि: तांबे पात्र में जल, दाहिने हाथ से, 'इदं पाद्यं/अर्घ्यं समर्पयामि' बोलते हुए। सूर्य: प्रातः पूर्व मुख, पतली धारा, गायत्री मंत्र।

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विस्तृत उत्तर

जल अर्पण की सरल विधि धर्म सिंधु में वर्णित है:

जल अर्पण के तीन रूप

1पाद्य (चरण जल)

हे भगवान, आपके चरणों को धोने के लिए जल अर्पित है।

> 'ॐ [देव नाम] पाद्यं समर्पयामि' — देवता के चरणों में जल छोड़ें।

2अर्घ्य (सम्मान जल)

हे भगवान, आपके हाथ धोने के लिए जल।

> 'ॐ [देव नाम] अर्घ्यं समर्पयामि'

3आचमन (पेय जल)

हे भगवान, पेय जल।

> 'ॐ [देव नाम] आचमनीयं समर्पयामि'

विधि

  1. 1तांबे के पात्र या आचमनी में जल
  2. 2दाहिने हाथ से या दोनों हाथों से
  3. 3भगवान के पास जल पात्र में धीरे से छोड़ें
  4. 4मंत्र उच्चारण के साथ

सूर्य अर्घ्य

प्रातः तांबे के लोटे से पतली धारा — सूर्य के दर्शन करते हुए — गायत्री मंत्र।

महत्व

जल = जीवन। देवता को जीवन का सबसे मूल तत्व अर्पित करना।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, नित्यकर्म पूजा प्रकाश
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