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तंत्र शास्त्र📜 रत्न शास्त्र, ज्योतिष, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

तंत्र में रत्नों का प्रयोग कैसे और क्यों किया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

रत्न = ग्रह ऊर्जा वाहक। 9 ग्रह-9 रत्न: सूर्य=माणिक्य, चंद्र=मोती, मंगल=मूंगा, बुध=पन्ना, गुरु=पुखराज, शुक्र=हीरा, शनि=नीलम, राहु=गोमेद, केतु=लहसुनिया। अभिमंत्रित → धारण। नीलम=सावधानी। ज्योतिषी → कुण्डली → सही रत्न।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र में रत्न = ग्रह/देवता शक्ति का भौतिक वाहक:

क्यों: प्रत्येक रत्न = विशिष्ट ग्रह ऊर्जा। शरीर पर धारण → ग्रह शक्ति शरीर में → ग्रह दोष शांत / ग्रह बलवान।

9 ग्रह = 9 रत्न

सूर्य=माणिक्य (Ruby), चंद्र=मोती (Pearl), मंगल=मूंगा (Coral), बुध=पन्ना (Emerald), गुरु=पुखराज (Yellow Sapphire), शुक्र=हीरा (Diamond), शनि=नीलम (Blue Sapphire), राहु=गोमेद (Hessonite), केतु=लहसुनिया (Cat's Eye)।

तांत्रिक प्रयोग

  1. 1अभिमंत्रित: रत्न → मंत्र जप → ऊर्जा संचार → धारण।
  2. 2यंत्र में जड़ित: विशिष्ट यंत्र + रत्न = शक्ति गुणित।
  3. 3पूजा में: रत्न देवता को अर्पित।

सावधानी: नीलम (शनि) = अत्यंत शक्तिशाली — बिना ज्योतिषी परामर्श कभी न पहनें। गलत रत्न = हानिकारक। प्रत्येक रत्न = कुण्डली विश्लेषण पश्चात।

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शास्त्रीय स्रोत
रत्न शास्त्र, ज्योतिष, तंत्र शास्त्र
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