ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
तंत्र शास्त्र📜 गुरु गीता, कुलार्णव तंत्र, शाक्त आगम1 मिनट पठन

तंत्र में गुरु परंपरा का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

गुरु परंपरा = तंत्र रीढ़। शक्ति: गुरु→शिष्य अखंड श्रृंखला। शुद्ध ज्ञान (मुखतः), सुरक्षा, पात्रता परीक्षण। कुलार्णव: शिव→शक्ति→गुरु→शिष्य। आगम-कल्पद्रुम: माता दीक्षा = 8 गुना फलदायी।

📖

विस्तृत उत्तर

गुरु परंपरा (गुरु शिष्य परम्परा) = तंत्र की रीढ़:

महत्व

  1. 1शक्ति हस्तांतरण: तंत्र शक्ति = गुरु→शिष्य→शिष्य — अखंड श्रृंखला। टूटे = शक्ति लुप्त।
  2. 2शुद्ध ज्ञान: पुस्तक = अपूर्ण/गलत हो सकती। गुरु मुख = शुद्ध, अनुभव सिद्ध।
  3. 3सुरक्षा: गुरु परंपरा = सुरक्षा परंपरा — शिष्य की रक्षा।
  4. 4पात्रता परीक्षण: गुरु = शिष्य की योग्यता जांचकर ही ज्ञान दें — अपात्र को नहीं।
  5. 5विकिपीडिया (तन्त्र): 'इस दर्शन के अन्तर्गत गुरु परम्परा का विशेष महत्व है।'

कुलार्णव तंत्र: गुरु परंपरा = शिव से शक्ति, शक्ति से गुरु, गुरु से शिष्य — अखंड।

आगम-कल्पद्रुम: 'स्त्रियो दीक्षा शुभा प्रोक्ता मातुश्चाष्टगुणाः स्मृताः' — स्त्री (माता) से दीक्षा = 8 गुना फलदायी। तंत्र में स्त्री गुरु = विशेष सम्मानित।

📜
शास्त्रीय स्रोत
गुरु गीता, कुलार्णव तंत्र, शाक्त आगम
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

गुरु परंपराशिष्यपरम्परातंत्र

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

तंत्र में गुरु परंपरा का क्या महत्व है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको तंत्र शास्त्र से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर गुरु गीता, कुलार्णव तंत्र, शाक्त आगम पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।