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तंत्र शास्त्र📜 कुलार्णव तंत्र, शाक्त परंपरा1 मिनट पठन

तंत्र में चक्रपूजा कैसे संपन्न की जाती है?

संक्षिप्त उत्तर

चक्रपूजा = सामूहिक तांत्रिक पूजा (वृत्ताकार)। केंद्र: देवी/यंत्र+गुरु। [समीक्षा आवश्यक] — विस्तृत विधि गोपनीय/गुरुमुखी। दीक्षित के लिए ही। इंटरनेट से=खतरनाक। शोषण से सावधान। उच्च आध्यात्मिक अनुष्ठान।

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विस्तृत उत्तर

चक्रपूजा = तांत्रिक साधकों की सामूहिक पूजा — अत्यंत गोपनीय:

सामान्य विवरण

  • साधक-साधिकाएं वृत्ताकार (चक्र) में बैठकर पूजा।
  • केंद्र में देवी/यंत्र स्थापित।
  • मंत्र जप, ध्यान, पूजा — सामूहिक ऊर्जा।
  • गुरु = चक्र के केंद्र में।

[समीक्षा आवश्यक]: चक्रपूजा की विस्तृत विधि = अत्यंत गोपनीय और गुरुमुखी। सार्वजनिक रूप से पूर्ण विधि देना = शास्त्र विरुद्ध और अनुचित।

ध्यान रखें

  • चक्रपूजा = दीक्षित साधकों के लिए ही।
  • इंटरनेट/पुस्तक से चक्रपूजा = अत्यंत खतरनाक।
  • चक्रपूजा ≠ अनैतिक — यह उच्च आध्यात्मिक अनुष्ठान है।
  • तथाकथित 'चक्रपूजा' के नाम पर शोषण से सावधान।
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शास्त्रीय स्रोत
कुलार्णव तंत्र, शाक्त परंपरा
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