विस्तृत उत्तर
ग्रहण काल = तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम अवसर — मंत्र शक्ति लाख गुना:
गणपति अथर्वशीर्ष (श्लोक)
सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ वा जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति' — सूर्य ग्रहण में महानदी/देवता निकट जप = मंत्र सिद्ध।
तांत्रिक महत्व
- 1ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन: ग्रहण = सूर्य/चंद्र की ऊर्जा में विशेष परिवर्तन → मंत्र ऊर्जा गहरी प्रवेश।
- 2सूक्ष्म द्वार खुले: ग्रहण = भौतिक+सूक्ष्म जगत के बीच द्वार = अधिक प्रभावी साधना।
- 3मंत्र सिद्धि: ग्रहण में जप = सामान्य से हजारों/लाखों गुना फल।
- 4तांत्रिक अनुष्ठान: ग्रहण = विशेष सिद्धि प्रयोग का समय — दीक्षित साधकों हेतु।
विधि: ग्रहण स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप। स्नान कर बैठें। जल में खड़े (नदी) = विशेष। ग्रहण पश्चात पुनः स्नान। भोजन/शयन वर्जित।
विस्तृत ग्रहण विषय पिछली एंट्री (Q515) में दिया गया है।