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तंत्र शास्त्र📜 मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र, गणपति अथर्वशीर्ष1 मिनट पठन

तंत्र साधना में ग्रहण काल का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' ग्रहण = लाख गुना फल। ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन, सूक्ष्म द्वार खुले। स्पर्श→मोक्ष निरंतर। स्नान+जल में। विस्तृत: Q515 देखें।

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विस्तृत उत्तर

ग्रहण काल = तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम अवसर — मंत्र शक्ति लाख गुना:

गणपति अथर्वशीर्ष (श्लोक)

सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ वा जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति' — सूर्य ग्रहण में महानदी/देवता निकट जप = मंत्र सिद्ध।

तांत्रिक महत्व

  1. 1ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन: ग्रहण = सूर्य/चंद्र की ऊर्जा में विशेष परिवर्तन → मंत्र ऊर्जा गहरी प्रवेश।
  2. 2सूक्ष्म द्वार खुले: ग्रहण = भौतिक+सूक्ष्म जगत के बीच द्वार = अधिक प्रभावी साधना।
  3. 3मंत्र सिद्धि: ग्रहण में जप = सामान्य से हजारों/लाखों गुना फल।
  4. 4तांत्रिक अनुष्ठान: ग्रहण = विशेष सिद्धि प्रयोग का समय — दीक्षित साधकों हेतु।

विधि: ग्रहण स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप। स्नान कर बैठें। जल में खड़े (नदी) = विशेष। ग्रहण पश्चात पुनः स्नान। भोजन/शयन वर्जित।

विस्तृत ग्रहण विषय पिछली एंट्री (Q515) में दिया गया है।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र, गणपति अथर्वशीर्ष
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