का सरल उत्तर
अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' ग्रहण = लाख गुना फल। ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन, सूक्ष्म द्वार खुले। स्पर्श→मोक्ष निरंतर। स्नान+जल में। विस्तृत: Q515 देखें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।