तंत्र साधना में ग्रहण काल का क्या महत्व है?
की चेकलिस्ट
अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' ग्रहण = लाख गुना फल। ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन, सूक्ष्म द्वार खुले। स्पर्श→मोक्ष निरंतर। स्नान+जल में। विस्तृत: Q515 देखें।
- 1ब्रह्मांडीय ऊर्जा परिवर्तन: ग्रहण = सूर्य/चंद्र की ऊर्जा में विशेष परिवर्तन → मंत्र ऊर्जा गहरी प्रवेश।
- 2सूक्ष्म द्वार खुले: ग्रहण = भौतिक+सूक्ष्म जगत के बीच द्वार = अधिक प्रभावी साधना।
- 3मंत्र सिद्धि: ग्रहण में जप = सामान्य से हजारों/लाखों गुना फल।
- 4तांत्रिक अनुष्ठान: ग्रहण = विशेष सिद्धि प्रयोग का समय — दीक्षित साधकों हेतु।
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तंत्र शास्त्र
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