विस्तृत उत्तर
प्रणव ओम् को ब्रह्म इसलिए कहा गया है क्योंकि वही एकाक्षर प्रणव चिन्तारहित भगवान् रुद्र का वाचक बताया गया है। वाणी और मन जिन तक पहुँचकर लौट आते हैं, उन रुद्र का वाचक यही एक अक्षर है। यही एकाक्षर प्रणव सृष्टि के परम कारण, सत्य-आनन्द और अमृतरूप परात्पर परम ब्रह्म का भी वाचक कहा गया है। आगे लिंगरूप प्रणव को सभी लोकों का सृष्टिकर्ता और अकार-उकार-मकार रूप तीन प्रकार का ईश्वर भी बताया गया है।
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