लोकमार्कण्डेय पुराण में ॐ और त्रैलोक्य का समन्वय कैसे किया गया है?मार्कण्डेय पुराण के अनुसार ॐ के 'अ' = भूलोक, 'उ' = भुवर्लोक और 'म' = स्वर्लोक। भुवर्लोक परब्रह्म का मध्यवर्ती कंपन है, कोई अलग इकाई नहीं।#मार्कण्डेय पुराण#ॐ#त्रैलोक्य
मंत्र साधनागायत्री मंत्र के साथ ॐ का उच्चारण क्योंॐ (प्रणव) संपूर्ण ध्वनियों का मूल और निर्गुण परब्रह्म का प्रतीक है। बिना ॐ के वैदिक मंत्र सिर विहीन शरीर के समान निष्फल माने जाते हैं; ॐ मंत्र की ऊर्जा को ब्रह्मांड से जोड़ता है।#गायत्री मंत्र
प्रणव रूपअकार, उकार, मकार क्या हैं?अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।#अकार#उकार#मकार
सृष्टि क्रमआकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?स्वर्ण अंड के ऊपरी पवित्र कपाल से आकाश और नीचे के भाग से पाँच लक्षणों वाली पृथ्वी की उत्पत्ति बताई गई है।#आकाश#पृथ्वी#स्वर्ण अंड
सृष्टि क्रमस्वर्ण अंड से सृष्टि कैसे हुई?लिंगरूप प्रणव से बीज योनि में स्थित होकर बढ़ा, स्वर्ण अंड बना और परमेश्वर ने उसे दो भागों में विभाजित किया।#स्वर्ण अंड#सृष्टि#प्रणव
प्रणव ओम्प्रणव ओम् को ब्रह्म क्यों कहा गया है?प्रणव ओम् को रुद्र, परम कारण, सत्य-आनन्द, अमृतरूप परम ब्रह्म और सृष्टिकर्ता लिंगरूप प्रणव का वाचक बताया गया है।#प्रणव#ओम्#ब्रह्म
प्रणव ओम्ओम् नाद कैसे प्रकट हुआ?ब्रह्मा और विष्णु के प्रणाम और विचार के बाद वहाँ स्पष्ट प्लुत स्वर से ओम्-ओम् नाद सुनाई पड़ा।#ओम्#नाद#प्रणव
लिंग तत्त्वशिवलिंग क्या है?लिंग को प्रधान कहा गया है और आगे वही लिंगरूप प्रणव सभी लोकों की सृष्टि करने वाला बताया गया है।#शिवलिंग#लिंग#प्रधान
जप और स्वाध्यायकौन सा जप सबसे श्रेष्ठ माना गया है?मानस जप सबसे श्रेष्ठ बताया गया है; वाचिक अधम और उपांशु उत्तम कहा गया है।#मानस जप#उपांशु जप#वाचिक जप
लोकक्या ॐ सृष्टि की पहली ध्वनि है?इस कथा में आदिनाद को ॐ से भी सूक्ष्म और पूर्व अवस्था माना गया है।#ॐ#आदिनाद#प्रणव
मंत्र जप'ॐ नमः शिवाय' का असली अर्थ क्या है?'ॐ' = प्रपंच सागर पार करने वाली नौका (सूक्ष्म प्रणव)। 'नमः' = अहंकार का समर्पण। 'शिवाय' = कल्याणकारी शिव को। पूर्ण अर्थ: 'मैं कल्याणकारी शिव के प्रति समर्पण करता हूँ।' इसका जप पांचों क्लेश भस्म करता है।#ॐ नमः शिवाय अर्थ#पंचाक्षर मंत्र#प्रणव
मंत्र और उपासना'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का क्या रहस्य है?'ॐ नमः शिवाय' = सनातन धर्म का सबसे पवित्र पंचाक्षरी मंत्र। उत्पत्ति: कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (श्री रुद्रम्)। 'ॐ' में ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र की एकता। भाव: जीव और परब्रह्म में कोई भेद नहीं। यह समस्त क्लेश दग्ध कर परम ज्ञान देता है।#ॐ नमः शिवाय#पंचाक्षरी मंत्र#प्रणव
मंत्र का स्वरूप और अर्थ'ॐ' का क्या अर्थ है?ॐ सनातन धर्म का परम पवित्र रहस्यमयी अक्षर है — यह पूर्ण वास्तविकता, परब्रह्म का नाद स्वरूप और ब्रह्मांड की उत्पत्ति का मूल स्वर है।#ॐ अर्थ#प्रणव#परब्रह्म
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षाषडाक्षर मंत्र क्या होता है?जब 'नमः शिवाय' के आदि में प्रणव 'ॐ' जोड़ा जाता है तब 'ॐ नमः शिवाय' बनता है जिसे 'षडाक्षर मंत्र' (छह अक्षरों वाला) कहते हैं।#षडाक्षर मंत्र#ॐ नमः शिवाय#प्रणव
गौरी बीज मंत्र'ॐ ह्रीं गौरये नमः' का क्या अर्थ है?'ॐ ह्रीं गौरये नमः' में ॐ = ब्रह्म का प्रतीक, ह्रीं = आदि शक्ति (माया बीज) का प्रतीक, गौरये नमः = गौरी देवी को नमस्कार।#ॐ ह्रीं गौरये नमः#मंत्र अर्थ#प्रणव
मंत्र विधिॐ का जप कितनी देर तक करना चाहिए?प्रारंभी: 5-10 मिनट/21 बार। मध्यम: 15-20 मिनट/108 बार। उन्नत: 30-60 मिनट। नियमितता > अवधि। धीरे बढ़ाएं। गुणवत्ता > मात्रा। पतंजलि: अर्थ भाव सहित = समय गौण।#ॐ#समय#अवधि