विस्तृत उत्तर
शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार, 'ॐ' सूक्ष्म प्रणव है जो प्रपंच (संसार) रूपी सागर को पार करने वाली नौका है, और 'नमः शिवाय' स्थूल प्रणव है।
इस मंत्र का निरंतर जप मनुष्य के अंतःकरण के पांचों क्लेशों को भस्म कर देता है और उसे शिव-स्वरूप में परिवर्तित कर देता है।
नमः' का अर्थ है 'मैं नमन करता हूँ' या 'मेरा अहंकार समर्पित है', और 'शिवाय' का अर्थ है 'जो मंगलकारी, कल्याणकारी है उस शिव को।' अतः पूर्ण अर्थ है: 'मैं कल्याणकारी शिव के प्रति समर्पण करता हूँ।





