विस्तृत उत्तर
पार्वती के युवा होने पर देवर्षि नारद उनके पिता हिमालय के राजमहल में पधारे। उन्होंने पार्वती के लक्षणों को देखकर स्पष्ट किया कि उनका विवाह भगवान शिव से ही होना निश्चित है।
नारद ने पार्वती को पंचाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का उपदेश दिया और उन्हें शिव की तपस्या करने की प्रेरणा दी।
अपने गुरु नारद के वचनों को शिरोधार्य कर, पार्वती ने राजमहल के सभी सुखों का त्याग कर दिया और अन्न-जल का परित्याग कर घोर तपस्या में लीन हो गईं। उनकी तपस्या इतनी उग्र थी कि संपूर्ण ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया।





