विस्तृत उत्तर
जब पार्वती सप्तर्षियों की परीक्षा में उत्तीर्ण हो गईं, तो भगवान शिव स्वयं एक 'जटिल ब्रह्मचारी' (तपस्वी) का वेश धारण कर पार्वती के आश्रम में आए। उन्होंने भी शिव की घोर निंदा आरंभ कर दी।
शिव की निंदा सुनकर पार्वती अत्यंत क्रोधित हो उठीं और उन्होंने कहा कि जो शिव की निंदा करता है, वह पाप का भागी होता है। जब पार्वती क्रोधित होकर वहाँ से जाने लगीं, तब भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और उन्होंने पार्वती का हाथ थाम लिया।





