विस्तृत उत्तर
जब भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और उन्होंने पार्वती का हाथ थाम लिया, तब शिव ने पार्वती से अत्यंत कोमल वचनों में कहा:
हे देवी! आज से मैं तुम्हारी तपस्या द्वारा खरीदा हुआ तुम्हारा दास हूँ।
तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं की प्रार्थना और पार्वती की असीम तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने पार्वती का पाणिग्रहण स्वीकार किया। यह विवाह कोई साधारण वैवाहिक समारोह नहीं था; यह प्रकृति और पुरुष का, चेतना और ऊर्जा का लौकिक और ब्रह्मांडीय मिलन था। इस विवाह में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, भूत-प्रेत और शिव के अघोरी गण सम्मिलित हुए।





