विस्तृत उत्तर
शिव-पार्वती विवाह में महामुनियों (श्रेष्ठ मुनिगणों) ने वेद मंत्रों का उच्चारण करके विवाह सम्पन्न करवाया।
चौपाई — 'जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई। गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥'
इसका अर्थ — वेदोंमें विवाहकी जैसी रीति कही गयी है, महामुनियोंने वह सब रीति करवायी। पर्वतराज हिमाचलने हाथमें कुश लेकर तथा कन्याका हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजीको समर्पण किया।
इसके पहले मुनियों के अनुशासन से शिवजी और पार्वतीजी ने गणेशजी का पूजन किया — 'मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि। कोउ सुनि संसय करैं जनि सुर अनादि जियँ जानि॥'





