विस्तृत उत्तर
पार्वती के संकल्प की दृढ़ता को परखने और उन्हें डिगाने के लिए देवताओं ने सप्तर्षियों को पार्वती के आश्रम में भेजा। सप्तर्षियों ने पार्वती को समझाया कि शिव तो भस्मधारी, श्मशानवासी, निर्गुण और अवधूत हैं, उनके साथ विवाह करके क्या सुख मिलेगा? उन्होंने परामर्श दिया कि विष्णु समस्त गुणों की खान हैं, अतः उनसे विवाह कर लो।
इस पर माता पार्वती ने अत्यंत दृढ़ता और प्रखरता से उत्तर दिया: 'मेरा शरीर पर्वत (पत्थर) से उत्पन्न हुआ है, अतः इसमें पर्वत की जड़ता और दृढ़ता प्रत्यक्ष देखने में आती है। मैंने नारद जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया है और उनके वचनों को मैं मिथ्या नहीं कर सकती। शिवजी निर्गुण हैं, वे तीनों गुणों से रहित और सबके स्वामी हैं। वस्त्र और आभूषण पहनना साधारण मनुष्यों का काम है। या तो मैं शिवजी के साथ विवाह करूंगी अन्यथा जन्म भर कुमारी रहूंगी।'
पार्वती के इस अकाट्य तर्क और दृढ़ निश्चय को देखकर सप्तर्षि उन्हें प्रणाम कर लौट गए।





