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पार्वती की तपस्या और परीक्षाएं⏱ 2 मिनट पठन

सप्तर्षियों ने पार्वती की परीक्षा कैसे ली?

सप्तर्षियों ने शिव की निंदा कर विष्णु से विवाह का सुझाव दिया। पार्वती ने दृढ़ता से उत्तर दिया: 'शिव निर्गुण हैं — सबके स्वामी।

संक्षिप्त उत्तर

सप्तर्षियों ने शिव की निंदा कर विष्णु से विवाह का सुझाव दिया। पार्वती ने दृढ़ता से उत्तर दिया: 'शिव निर्गुण हैं — सबके स्वामी। या शिव से विवाह या जीवनभर कुमारी।' अकाट्य तर्क सुनकर सप्तर्षि प्रणाम करके लौटे।

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विस्तृत उत्तर

पार्वती के संकल्प की दृढ़ता को परखने और उन्हें डिगाने के लिए देवताओं ने सप्तर्षियों को पार्वती के आश्रम में भेजा। सप्तर्षियों ने पार्वती को समझाया कि शिव तो भस्मधारी, श्मशानवासी, निर्गुण और अवधूत हैं, उनके साथ विवाह करके क्या सुख मिलेगा? उन्होंने परामर्श दिया कि विष्णु समस्त गुणों की खान हैं, अतः उनसे विवाह कर लो।

इस पर माता पार्वती ने अत्यंत दृढ़ता और प्रखरता से उत्तर दिया: 'मेरा शरीर पर्वत (पत्थर) से उत्पन्न हुआ है, अतः इसमें पर्वत की जड़ता और दृढ़ता प्रत्यक्ष देखने में आती है। मैंने नारद जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया है और उनके वचनों को मैं मिथ्या नहीं कर सकती। शिवजी निर्गुण हैं, वे तीनों गुणों से रहित और सबके स्वामी हैं। वस्त्र और आभूषण पहनना साधारण मनुष्यों का काम है। या तो मैं शिवजी के साथ विवाह करूंगी अन्यथा जन्म भर कुमारी रहूंगी।'

पार्वती के इस अकाट्य तर्क और दृढ़ निश्चय को देखकर सप्तर्षि उन्हें प्रणाम कर लौट गए।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

सप्तर्षियों ने पार्वती की परीक्षा कैसे ली को संदर्भ सहित समझें

सप्तर्षियों ने पार्वती की परीक्षा कैसे ली का सबसे सीधा सार यह है: सप्तर्षियों ने शिव की निंदा कर विष्णु से विवाह का सुझाव दिया। पार्वती ने दृढ़ता से उत्तर दिया: 'शिव निर्गुण हैं — सबके स्वामी। या शिव से विवाह...

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पार्वती की तपस्या और परीक्षाएं प्रश्नोत्तर
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