विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के पार्वती खंड में यह परीक्षा-प्रसंग अत्यंत सुंदर और प्रेरणाप्रद है।
शिव का प्रश्न — शिव ब्रह्मचारी वटु के रूप में पार्वती के पास आए और कहा — 'हे देवी, तुम इतनी सुंदर और गुणी हो, फिर भी एक ऐसे योगी से विवाह करना चाहती हो जो वनवासी है, जिनके पास कोई वैभव नहीं और जो श्मशानवासी औघड़ हैं — क्या यह तुम्हारे योग्य है?'
शिव की जान-बूझकर अपनी निंदा — शिव ने जान-बूझकर अपनी ही निंदा की। वे देखना चाहते थे कि पार्वती शिव की निंदा सुनकर क्या करती हैं — क्या उनका संकल्प डगमगाता है।
पार्वती की दृढ़ प्रतिक्रिया — पार्वती ने क्रोध से उत्तर दिया, शिव की महानता का पूरे आत्मविश्वास से बखान किया और कहा — 'जो शिव की निंदा करे उसके सामने मैं एक पल नहीं रहूँगी।' पार्वती की यह अटूट निष्ठा देखकर शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और अपने असली रूप में उनके सामने प्रकट हो गए।





