विस्तृत उत्तर
पार्वती की कठोर तपस्या के बावजूद शिव का ध्यान उनकी ओर न जाना — इसके पीछे कई कारण थे।
शिव का महायोगी स्वभाव — शिव 'महायोगी' हैं। वे सांसारिक आकर्षणों से पूर्णतः विरक्त हैं। किसी की तपस्या से प्रसन्न होकर विवाह करना उनके स्वभाव के विपरीत था। शिव की समाधि को भंग करना साधारण जीवों के लिए संभव नहीं था।
सती के वियोग में समाधि — सती के आत्मदाह के बाद शिव ने घोर तपस्या में प्रवेश किया था। शिव पुराण में वर्णित है कि वे सती के वियोग में गहरी समाधि में लीन थे। इस समाधि में पार्वती की बाह्य सेवा उन तक पहुँच नहीं पाती थी।
पार्वती की परीक्षा — शिव पहले यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि पार्वती की भक्ति वास्तविक है। वे शिव के औघड़ और वनवासी स्वभाव को सच में स्वीकार करती हैं या नहीं — यह परखना था।
देवताओं का हस्तक्षेप — अंततः तारकासुर की समस्या के कारण देवताओं को कामदेव का सहारा लेना पड़ा क्योंकि शिव की समाधि अन्यथा भंग नहीं होती थी।





