विस्तृत उत्तर
देवताओं ने (ब्रह्मवाणी की पुष्टि के लिये) पार्वतीजी की परीक्षा लेने के लिये सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा।
बालकाण्ड में कहा — ऋषियोंने वहाँ जाकर पार्वतीको देखा — मानो मूर्तिमान् तपस्या ही हो। मुनि बोले — हे शैलकुमारी! सुनो, तुम किसलिये इतना कठोर तप कर रही हो?
चौपाई — 'रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी। बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥'
इसका अर्थ — ऋषियोंने वहाँ जाकर पार्वतीको कैसा देखा, मानो मूर्तिमान् तपस्या ही हो। मुनि बोले — हे शैलकुमारी! सुनो, तुम किसलिये इतना कठोर तप कर रही हो?
सप्तर्षियों ने पार्वतीजी से प्रश्न किये, शिवजी की निन्दा की और उनका संकल्प डिगाने का प्रयास किया — यह उनकी परीक्षा थी।





