का सरल उत्तर
सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा। ऋषियों ने पार्वतीजी को देखा — 'मूरतिमंत तपस्या जैसी' — मानो मूर्तिमान तपस्या ही हो। उन्होंने प्रश्न पूछे और शिवजी की निन्दा करके पार्वतीजी का संकल्प डिगाने का प्रयास किया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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