विस्तृत उत्तर
सुनटनर्तक (नाचने वाले ब्राह्मण नर्तक) का यह अवतार भी शिव पुराण और रामचरितमानस में वर्णित है और पार्वती की परीक्षा से सम्बन्धित है।
इस अवतार की कथा ब्रह्मचारी अवतार से भिन्न है। सुनटनर्तक अवतार में शिव जी एक नाचने वाले ब्राह्मण भिक्षु का रूप धारण करके पार्वती के पिता हिमाचल के महल में गए। वहाँ वे डमरू बजाते और नृत्य करते हुए भिक्षा माँगने लगे। उनके नृत्य में अद्भुत मोह और आकर्षण था।
शिव जी ने नर्तक के रूप में हिमालय के दरबार में अपनी कला दिखाई और भिक्षा में पार्वती की माँग की — कहा कि उन्हें उनकी कन्या पार्वती चाहिए। यह सुनकर हिमालय और मैना चकित हुए। जब माँग ठुकराई गई, तो नर्तक ने संकेत दिए कि वे कोई साधारण पुरुष नहीं हैं।
एक अन्य संदर्भ में, यह अवतार पार्वती की तपस्या के बाद शिव की परीक्षा लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया जाता है — जहाँ शिव ने नर्तक रूप में आकर पार्वती के प्रेम को परखा। पार्वती ने उस नर्तक में शिव को पहचाना और अपना निश्चय दोहराया।
प्रतीकात्मक दृष्टि से यह अवतार नटराज शिव का ही एक स्वरूप है — जो नृत्य के माध्यम से सृष्टि की लय और ब्रह्मांड के संचालन का प्रतीक है।





