विस्तृत उत्तर
कैलास धाम भगवान शिव का परम निवास है, जो हिमालय में स्थित कैलास पर्वत पर है। शास्त्रीय आधार के अनुसार स्कन्द पुराण के नागर खण्ड के अनुसार वह श्राद्धकर्ता मृत्यु के पश्चात् निश्चित रूप से कैलास धाम को प्राप्त करता है और भगवान शिव के गणों के साथ मोद यानी आनन्द प्राप्त करता है।
कैलास पर्वत का भौगोलिक परिचय इस प्रकार है। कैलास पर्वत तिब्बत में स्थित है, जो हिमालय की पर्वत-श्रृंखला का एक भाग है। इसकी ऊँचाई 6,638 मीटर है। इसे हिन्दू, बौद्ध, जैन, और बोन परम्पराओं में पवित्र माना जाता है। हिन्दू परम्परा में यह शिव का निवास है।
कैलास धाम का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च है। शैव परम्परा में कैलास सर्वोच्च धाम है। यह वैकुण्ठ और स्वर्ग से भी ऊपर माना जाता है। यहाँ पहुँचने पर जीवात्मा को परम आनन्द और मुक्ति मिलती है।
कैलास में निवास करने वाले देवता के रूप में शिव और पार्वती का वर्णन पुराणों में है। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि शिव कैलास पर ध्यान में बैठे रहते हैं, और उनके चारों ओर उनके गण उपस्थित रहते हैं। पार्वती भी कैलास में निवास करती हैं।
कैलास धाम की चार प्रमुख विशेषताएँ हैं। पहली विशेषता है शिव की उपस्थिति। कैलास में स्वयं भगवान शिव निवास करते हैं। यह उनका प्रिय आवास है। दूसरी विशेषता है दिव्य आनन्द। कैलास में जाने के बाद जीवात्मा परम आनन्द पाती है। यह आनन्द लौकिक सुखों से कहीं अधिक है।
तीसरी विशेषता है पुनर्जन्म से मुक्ति। कैलास प्राप्त होने पर जीवात्मा पुनः संसार के चक्र में नहीं आती। वह शिव के साथ रहती है। चौथी विशेषता है शिव गणों का साहचर्य। कैलास में शिव के दिव्य गण निवास करते हैं, और प्राप्तकर्ता उनके साथ आनन्द पाता है।
कैलास प्राप्ति के साधन अनेक हैं। शिव-भक्ति, शिव-पूजा, शिवरात्रि-व्रत, और श्राद्ध - सब से कैलास मिल सकता है। परंतु द्वितीया श्राद्ध से कैलास मिलने का वर्णन स्कन्द पुराण में विशेष रूप से है। यह एक अनूठा और विशिष्ट मार्ग है।
कैलास धाम और वैकुण्ठ का अंतर देखें। वैकुण्ठ भगवान विष्णु का धाम है। कैलास भगवान शिव का धाम है। दोनों परम धाम हैं। शैव परम्परा में कैलास सर्वोच्च है, और वैष्णव परम्परा में वैकुण्ठ। परंतु द्वितीया श्राद्ध का सम्बन्ध स्कन्द पुराण से है, जो शैव पुराण है, इसलिए फल कैलास है।
कैलास-यात्रा का महत्व भी विशेष है। जो जीवित अवस्था में कैलास की परिक्रमा करते हैं, उन्हें भी अत्यंत पुण्य मिलता है। परंतु मृत्यु के बाद कैलास प्राप्त करना अधिक श्रेष्ठ है, क्योंकि यह स्थायी निवास है।
कैलास धाम का वर्णन स्कन्द पुराण के नागर खण्ड में स कैलासमवाप्नोति शिवेन सह मोदते श्लोक में है। अवाप्नोति का अर्थ है प्राप्त करता है। यह शब्द निश्चितता दर्शाता है। यानी द्वितीया श्राद्ध करने वाला निश्चित रूप से कैलास प्राप्त करता है।
शिवेन सह मोदते का अर्थ भी विशेष है। सह का अर्थ है साथ। मोदते का अर्थ है आनन्द पाता है। यानी केवल कैलास में प्रवेश नहीं, बल्कि स्वयं शिव के साथ आनन्द का अनुभव। यह परम भक्त के लिए सर्वोच्च प्राप्ति है।
कैलास धाम की प्राप्ति का व्यावहारिक संदेश यह है कि द्वितीया श्राद्ध केवल पितरों के लिए नहीं, बल्कि कर्ता की अपनी आत्मा के उद्धार के लिए भी है। पितरों को तृप्ति देने से कर्ता को शिव की कृपा मिलती है, और मृत्यु के बाद कैलास का मार्ग खुलता है।
द्वितीया श्राद्ध का सर्वोच्च संदेश यह है कि पितृ-सेवा और ईश्वर-भक्ति में कोई भेद नहीं है। जो अपने पितरों के प्रति श्रद्धावान है, वह शिव का प्रिय है। और जो शिव का प्रिय है, वह कैलास का अधिकारी है। शास्त्रीय आधार के रूप में स्कन्द महापुराण नागर खण्ड अध्याय 230 इस सिद्धांत का प्रमुख प्रामाणिक स्रोत है। निष्कर्षतः कैलास धाम भगवान शिव का परम निवास है, जो हिमालय में स्थित कैलास पर्वत पर है। शैव परम्परा में यह सर्वोच्च धाम है। द्वितीया श्राद्ध करने से मृत्यु के बाद कैलास की प्राप्ति होती है, शिव के साथ परम आनन्द मिलता है, और इस लोक में विपुल सम्पदा मिलती है।
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