विस्तृत उत्तर
वीरभद्र अवतार भगवान शिव के क्रोध का सबसे प्रचंड और भयंकर प्रकटीकरण है। शिव पुराण में इस अवतार की कथा इस प्रकार है।
जब माता सती ने दक्ष के यज्ञ में अपने पति शिव के अपमान को सहन न करते हुए योगाग्नि से अपनी देह का त्याग कर दिया, तब इस समाचार से भगवान शिव का क्रोध असह्य हो गया। उनके क्रोध की अग्नि में सम्पूर्ण ब्रह्मांड कांप उठा।
अत्यंत क्रोधावेश में शिव जी ने अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे पर्वत पर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से एक महाभयंकर, विशालकाय, रोद्र रूपधारी वीर पुरुष प्रकट हुआ — यही वीरभद्र हैं। वीरभद्र शिव जी का प्रलयंकारी गण और अवतार दोनों माने जाते हैं। वे सहस्त्र भुजाओं से युक्त, दिव्यास्त्रों से सज्जित और अत्यंत रोद्र रूप के थे।
शिव जी ने वीरभद्र को आदेश दिया — 'जाओ और दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करो।' वीरभद्र भद्रकाली और शिव के सभी गणों के साथ दक्ष के यज्ञस्थल कनखल पहुँचे। वहाँ उन्होंने भयंकर संहार किया — देव और ऋषि भाग खड़े हुए, यज्ञ को विध्वंस किया और अंत में दक्ष प्रजापति का सिर काटकर शिव के समक्ष रख दिया। बाद में ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर शिव ने दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया।





