विस्तृत उत्तर
नंदी अवतार की कथा शिव पुराण में सुंदर रूप से वर्णित है। नंदी भगवान शिव का प्रिय गण, वाहन और द्वारपाल — तीनों हैं। उन्हें शिव का अवतार माना जाता है।
कथा इस प्रकार है — शिलाद नामक एक मुनि ब्रह्मचारी थे। उनका वंश समाप्त होता देखकर उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद ने विचार किया कि वे संसार की सामान्य रीति से नहीं, बल्कि अयोनिज (माँ के गर्भ से नहीं) और मृत्युहीन संतान चाहते थे। इस विशेष कामना के साथ उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की।
शिव जी ने प्रसन्न होकर शिलाद को वरदान दिया कि वे स्वयं उनके यहाँ पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कुछ समय पश्चात शिलाद मुनि जब खेत जोत रहे थे, तो भूमि से एक सुंदर बालक उत्पन्न हुआ। शिलाद ने उसका नाम 'नंदी' रखा।
शिव जी ने नंदी को अपना गणाध्यक्ष — गणों का प्रमुख — बनाया। मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ। नंदी बैल के रूप में शिव के वाहन बने। वे कैलाश के द्वार पर सदा शिव की सेवा में तत्पर रहते हैं। नंदी को कर्म का प्रतीक माना जाता है — उनका संदेश है कि ईश्वर-सेवा में लीन रहकर अपना कर्तव्य निभाना ही जीवन का सार है।





