विस्तृत उत्तर
वैराज देवगण तपोलोक में निवास करने वाले अयोनिज देवगण हैं। श्रीविष्णु पुराण और वायु पुराण में कहा गया है कि तपोलोक में वैराज नामक अयोनिज देवगणों का वास है, जो जन्म-मरण और दाह के प्रभाव से मुक्त हैं। इन देवगणों की उत्पत्ति किसी भौतिक गर्भ से नहीं हुई है, बल्कि ये ब्रह्मा जी के विराट स्वरूप, अर्थात विराज या हिरण्यगर्भ, से सीधे प्रकट हुए हैं। वायु पुराण के अनुसार सृष्टि के आदिकाल में ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में विभक्त किया, जिससे पुरुष और शतरूपा की उत्पत्ति हुई, और इसी विराज स्वरूप से उत्पन्न होने के कारण इन देवताओं को वैराज कहा जाता है।
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