विस्तृत उत्तर
आगम ग्रंथों में पिंगलेश्वर को एक 'सिद्ध क्षेत्र' माना गया है। सिद्ध क्षेत्र वह विशिष्ट ऊर्जा-केंद्र होता है जहाँ भौतिक जगत और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मध्य का आवरण अत्यंत क्षीण हो जाता है और पूर्व काल के सिद्धों, अघोरियों व शिव गणों के तप की घनीभूत ऊर्जा सूक्ष्म रूप में संचित रहती है। यह सिद्ध क्षेत्र इसलिए है क्योंकि यहाँ साक्षात् भगवान शिव के गण 'पिंगल' ने कठोर तप कर शिव-सायुज्य प्राप्त किया था। यहाँ की भूमि में वह अग्नि ऊर्जा आज भी जाग्रत मानी जाती है, जो साधक के संकल्प को तत्काल सिद्ध करती है।





