विस्तृत उत्तर
हाँ, शास्त्रों के अनुसार स्वर्लोक की सत्ता तपस्या और शक्ति पर आधारित है जिसे असुर भी अपनी तपस्या के बल पर देवताओं से छीन सकते हैं। मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य खंड में स्वर्लोक पर असुरों के अधिकार का अत्यंत सजीव वर्णन है। जब शुंभ और निशुंभ नामक महापराक्रमी असुरों ने अपनी घोर तपस्या के बल पर असीमित शक्तियां प्राप्त कर लीं तो उन्होंने स्वर्लोक पर आक्रमण कर दिया। उन्होंने देवराज इन्द्र, अग्नि, कुबेर, सूर्य, चंद्र, पवन और वरुण के सभी यज्ञ-भाग और उनके प्रशासनिक अधिकारों को बलपूर्वक छीन लिया। असुरों ने देवताओं को स्वर्ग से निर्वासित कर दिया जिसके पश्चात इन्द्र आदि देवताओं को हिमालय जाकर भगवती अपराजिता की स्तुति करनी पड़ी।
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