विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार नंदी और शिवगण शारीरिक बल और हठयोग के अधिष्ठाता माने जाते हैं। चूँकि नंदीषेण एक 'योद्धा-गण' थे, इसलिए उनके द्वारा स्थापित शिवलिंग साधक के भीतर 'वीर भाव', ओज और यौगिक तेज को जाग्रत करता है। इसी कारण काशी के अखाड़ों के पहलवान, नाथ संप्रदाय के साधक और हठयोगी शारीरिक बल और आसन-सिद्धि की प्राप्ति के लिए इस शिवलिंग की पूजा करते हैं।





