विस्तृत उत्तर
## हिंदू धर्म में योग के प्रकार
गीता और परवर्ती ग्रंथों में योग के अनेक मार्ग बताए गए हैं। मुख्य चार हैं:
### 1. ज्ञानयोग (Jnana Yoga)
- ▸बुद्धि और विवेक के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग
- ▸'मैं कौन हूँ' के विचार-मनन द्वारा आत्मज्ञान की प्राप्ति
- ▸गीता अध्याय 4 और 13 में विस्तृत वर्णन
- ▸बौद्धिक स्वभाव के साधकों के लिए उपयुक्त
### 2. भक्तियोग (Bhakti Yoga)
- ▸प्रेम और समर्पण के माध्यम से ईश्वर-प्राप्ति
- ▸गीता अध्याय 12 इसे श्रेष्ठ मार्ग बताता है
- ▸भावनात्मक स्वभाव के साधकों के लिए
- ▸नवधा भक्ति इसका व्यावहारिक रूप है
### 3. कर्मयोग (Karma Yoga)
- ▸निष्काम और फलासक्ति रहित कर्म का मार्ग
- ▸गीता (2/47): *'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'*
- ▸सामाजिक जीवन जीते हुए मोक्ष का मार्ग
- ▸कर्मशील और व्यावहारिक स्वभाव के लिए
### 4. राजयोग (Raja Yoga)
- ▸पतंजलि के अष्टांग योग पर आधारित
- ▸यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
- ▸वैज्ञानिक विधि से चित्त की शुद्धि और ईश्वर-साक्षात्कार
### 5. हठयोग
- ▸शरीर और प्राण के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति
- ▸आसन, मुद्रा, बंध और प्राणायाम इसके अंग हैं
- ▸हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता प्रमुख ग्रंथ
### 6. तंत्रयोग / कुण्डलिनी योग
- ▸शक्ति (कुण्डलिनी) के जागरण का मार्ग
- ▸तंत्र और शाक्त परंपरा में विशेष महत्व
- ▸गुरु-मार्गदर्शन अनिवार्य
सारांश: गीता (13/24) में कहा गया है — कोई ध्यान से, कोई ज्ञान से, कोई कर्म से परमात्मा को पाता है — सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।





