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योग दर्शन प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

योग दर्शन से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

हिंदू धर्म में योग के प्रकार क्या हैं?

हिंदू धर्म में मुख्य रूप से चार योग मार्ग हैं — ज्ञानयोग (बुद्धि), भक्तियोग (प्रेम), कर्मयोग (निष्काम कर्म) और राजयोग (अष्टांग)। इसके अतिरिक्त हठयोग और कुण्डलिनी योग भी प्रमुख परंपराएं हैं।

योगज्ञानयोगभक्तियोग
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हिंदू धर्म में ध्यान कैसे किया जाता है?

गीता (6/11-15) और योगसूत्र के अनुसार ध्यान के लिए — एकांत स्थान, उचित आसन, प्राणायाम, इष्ट विषय पर धारणा और नियमित अभ्यास आवश्यक है। ध्यान का उद्देश्य चित्त की एकाग्रता और अंततः समाधि एवं मोक्ष की प्राप्ति है।

ध्यानमेडिटेशनसाधना
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ध्यान क्या है?

पतंजलि के अनुसार 'तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्' — धारणा के स्थान पर चित्त का निरंतर एकाग्र प्रवाह ध्यान है। यह अष्टांग योग का सातवाँ अंग है जिसमें मन किसी एक विषय पर बिना बाधा के केंद्रित रहता है।

ध्यानमेडिटेशनएकाग्रता
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योग क्या है?

पतंजलि के अनुसार 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। यह शरीर, मन और आत्मा को साधने की समग्र पद्धति है जिसके आठ अंग हैं — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।

योगपतंजलिअष्टांग योग
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शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान — पांच नियम क्या हैं?

पतंजलि योग सूत्र (2.32): शौच (पवित्रता), संतोष (संतुष्टि), तप (अनुशासन/द्वंद्व सहन), स्वाध्याय (शास्त्र अध्ययन + ॐ जप), ईश्वर प्रणिधान (ईश्वर समर्पण)। ये अष्टांग योग का दूसरा अंग हैं। तप+स्वाध्याय+ईश्वर प्रणिधान = क्रियायोग।

पांच नियमअष्टांग योगपतंजलि
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योग दर्शन — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर योग दर्शन श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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योग दर्शन को गहराई से समझने का तरीका

योग दर्शन प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।