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नवग्रह परिचय प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

नवग्रह परिचय से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

नवग्रहों की उपासना करने से क्या होता है?

नवग्रह उपासना से ब्रह्मांडीय शक्तियों के साथ सामंजस्य बनता है — यह परोक्ष रूप से परब्रह्म की ही आराधना है जो चित्त शुद्धि करके परम सत्य की ओर ले जाती है।

नवग्रह उपासनापरब्रह्म आराधनाब्रह्मांडीय सामंजस्य
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नवग्रह और त्रिदेवों का क्या संबंध है?

नवग्रह त्रिदेवों से अभिन्न रूप से जुड़े हैं — बृहस्पति देवगुरु हैं, शुक्र असुरगुरु, शनिदेव शिव के परम भक्त। उनकी उपासना परोक्ष रूप से परब्रह्म की ही आराधना है।

त्रिदेव संबंधबृहस्पति शुक्रशनिदेव शिव
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नवग्रहों की रचना किसने की?

नवग्रहों की रचना परमपिता ब्रह्मा ने धर्म की व्यवस्था बनाए रखने के लिए की — उनका स्वरूप और उत्पत्ति पुराणों में स्पष्ट वर्णित है।

नवग्रह रचनापरमपिता ब्रह्माधर्म व्यवस्था
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ज्योतिष शास्त्र में 'ग्रह' शब्द का क्या अर्थ है?

ज्योतिष शास्त्र में 'ग्रह' का अर्थ केवल planet नहीं बल्कि 'जो ग्रहण करे या पकड़े' है — ये दिव्य सत्ताएं प्रत्येक जीव के कर्मों को पकड़कर उचित फल देती हैं।

ग्रह शब्द अर्थग्रहण करनाकर्म फल
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नवग्रह क्या हैं?

नवग्रह केवल खगोलीय पिंड नहीं — परमपिता ब्रह्मा द्वारा नियुक्त वे दिव्य शक्तियाँ हैं जो मनुष्य के कर्मों का फल देती हैं और ब्रह्मांडीय न्याय के प्रशासक हैं।

नवग्रहब्रह्मांडीय प्रशासककर्मफल
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नवग्रह परिचय — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नवग्रह परिचय श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नवग्रह परिचय को गहराई से समझने का तरीका

नवग्रह परिचय प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।