विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की दृष्टि में यह ब्रह्मांड जड़ पदार्थों का समूह मात्र नहीं, अपितु एक चैतन्य, जीवंत एवं दिव्य लीला है। इस विराट ब्रह्मांडीय व्यवस्था के प्रत्येक कण में परमात्मा की चेतना व्याप्त है।
इसी दिव्य व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने हेतु परमपिता ब्रह्मा ने जिन दिव्य शक्तियों को नियुक्त किया, वे ही नवग्रह कहलाते हैं।
ये केवल खगोलीय पिंड नहीं, अपितु मनुष्य के कर्मों का फल प्रदान करने वाले ब्रह्मांडीय विधान के प्रशासक हैं।
वे ब्रह्मांडीय न्याय के देवता हैं, जिनकी रचना स्वयं ब्रह्मा ने धर्म की व्यवस्था बनाए रखने के लिए की है।





