विस्तृत उत्तर
महातल में जन्म लेने वाले जीव नरक इसलिए नहीं जाते क्योंकि उनके कर्म केवल घोर पापों के नहीं, बल्कि सकाम पुण्यों और भौतिक उपलब्धियों के मिश्रित फल होते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्ण चोरी, गुरु-पत्नी गमन जैसे महापातक करने वाले पापी नरकों में कठोर दंड भोगते हैं। इसके विपरीत महातल में वे जीव जन्म लेते हैं जिन्होंने तपस्या, दान-पुण्य, बड़े यज्ञ और भौतिक उपलब्धियाँ तो प्राप्त कीं, पर आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर भक्ति का अभाव रखा। इसलिए उन्हें नरक में दंड नहीं, बल्कि बिल-स्वर्ग में भौतिक सुखों का भोग मिलता है।
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