विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के तृतीय और चतुर्थ अध्याय में तामिस्र नरक के पात्रों का विस्तृत वर्णन है।
पति-पत्नी को धोखा — गरुड़ पुराण में — 'जो स्त्री या पुरुष अपने जीवनसाथी को धोखा देता है, उन्हें तामिस्र और महातामिस्र नामक नरक में भेजा जाता है।'
काम-वासना में लिप्तता — 'जो स्त्री और पुरुष अनैतिक रूप से काम-वासना में लिप्त रहते हैं, पुण्य तिथियों में, व्रत में, श्राद्ध के दिनों में संबंध बनाते हैं — वह पाप के भागी होकर तामिस्र नरक को भोगते हैं।'
निर्दोष जीव-हत्या — 'जो मनुष्य लोभ या स्वाद के लिए निर्दोष जानवरों की हत्या करता है, उसे मरने के बाद तामिस्र नरक में भेजा जाता है।'
तामिस्र का अर्थ — 'तामिस्र' = घना अंधकार। इस नरक में आत्मा को अंधकारमय गुफा में बंद कर लोहे की छड़ों से लगातार पीटा जाता है। 'उसे कोई शांति नहीं मिलती, केवल तड़प ही उसका भाग्य होता है।'



