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श्राद्ध के प्रकार प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

श्राद्ध के प्रकार से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

पार्वण श्राद्ध क्या है?

पार्वण श्राद्ध = पितृ पक्ष में किया जाने वाला श्राद्ध। 'पर्व' (विशेष काल) से नाम। तीन पीढ़ियों (पिता, पितामह, प्रपितामह) के पितरों का संयुक्त तर्पण और पिण्डदान। प्रतिपदा श्राद्ध भी इसी कोटि का।

पार्वण श्राद्धपितृ पक्षतीन पीढ़ी
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काम्य श्राद्ध क्या होता है?

काम्य श्राद्ध = किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाने वाला श्राद्ध। रोहिणी आदि नक्षत्रों में किया जाता है। 'काम' (इच्छा) से नाम — सकाम कर्म।

काम्य श्राद्धमनोकामनारोहिणी नक्षत्र
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नैमित्तिक श्राद्ध किसे कहते हैं?

नैमित्तिक श्राद्ध = किसी विशेष अवसर (निमित्त) पर किया जाने वाला श्राद्ध। मुख्य उदाहरण = पुत्र जन्म के अवसर पर। 'निमित्त' से बना — विशेष कारण के लिए किया गया।

नैमित्तिक श्राद्धपुत्र जन्मविशेष अवसर
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नित्य श्राद्ध क्या है?

नित्य श्राद्ध = जो श्राद्ध प्रतिदिन किया जाए। दैनिक नियमित कर्म, बिना किसी विशेष अवसर के। तीन मुख्य श्राद्ध प्रकारों में पहला।

नित्य श्राद्धप्रतिदिनदैनिक
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श्राद्ध कितने प्रकार के होते हैं?

मुख्य 3 प्रकार: (1) नित्य = प्रतिदिन (2) नैमित्तिक = विशेष अवसर जैसे पुत्र जन्म (3) काम्य = मनोकामना हेतु, रोहिणी नक्षत्र में। चौथा विशिष्ट = पार्वण श्राद्ध (पितृ पक्ष में 3 पीढ़ियों का संयुक्त तर्पण-पिण्डदान)।

श्राद्ध प्रकारनित्यनैमित्तिक
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श्राद्ध के प्रकार — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्राद्ध के प्रकार श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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श्राद्ध के प्रकार को गहराई से समझने का तरीका

श्राद्ध के प्रकार प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।