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सूर्य अर्घ्य प्रश्नोत्तर — 9 प्रश्न

सूर्य अर्घ्य से जुड़े 9 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 9 प्रश्न

अर्घ्य के बाद प्रदक्षिणा और प्रणाम कैसे करते हैं?

अर्घ्य के बाद: अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें। फिर सूर्य देव को साष्टांग (8 अंगों से) या पंचांग (5 अंगों से) प्रणाम करें।

प्रदक्षिणासाष्टांग प्रणामसूर्य अर्घ्य
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अर्घ्य का पानी गिरने के बाद क्या करते हैं?

अर्घ्य का जल जब पृथ्वी पर गिरे तो: उस अमृततुल्य जल को दाहिने हाथ की उंगलियों से स्पर्श करके मस्तक, कंठ और दोनों नेत्रों पर लगाएं। यह सूर्य ऊर्जा के आत्मसातीकरण की प्रक्रिया है।

अर्घ्य जलअमृततुल्यमस्तक नेत्र स्पर्श
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'एहि सूर्य सहस्रांशो' मंत्र का क्या अर्थ है?

'एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥' अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले, तेज के भंडार, जगत के स्वामी सूर्य! मुझ पर अनुकम्पा करें और मेरी भक्तिपूर्वक दी अर्घ्य स्वीकार करें, हे दिवाकर!

एहि सूर्य सहस्रांशोतेजोराशिजगत्पति
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'ॐ खखोल्खाय स्वाहा' मंत्र का क्या महत्व है?

भविष्य पुराण: श्रीकृष्ण ने पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए 'ॐ खखोल्खाय स्वाहा' मंत्र दिया। साम्ब ने 12 वर्ष चंद्रभागा नदी तट पर तपस्या कर रोग मुक्ति पाई। अर्घ्य देते समय दोनों हथेलियों से जल अर्पण करते हुए मानसिक जप।

खखोल्खाय स्वाहाभविष्य पुराणसाम्ब
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मकर संक्रांति पर सूर्य अर्घ्य का मंत्र क्या है?

सूर्य अर्घ्य मंत्र: (1) 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' — 11 या 108 बार, (2) कालिका पुराण: 'ॐ नमो विवस्वते ब्रह्मन् भास्वते विष्णुतेजसे...' (3) 'एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥'

सूर्य अर्घ्य मंत्रॐ घृणि सूर्यायएहि सूर्य
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अर्घ्य देते समय दृष्टि कहाँ रखनी चाहिए — इसका वैज्ञानिक कारण क्या है?

अर्घ्य देते समय दृष्टि: गिरती जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। वैज्ञानिक कारण: क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) का प्राचीन स्वरूप। जलधारा से छनकर प्रातःकालीन सूर्य रश्मियाँ = नेत्र ज्योति वृद्धि + पीनियल ग्रंथि सक्रिय + सर्कैडियन रिदम संतुलित।

अर्घ्य दृष्टिक्रोमोथेरेपीपीनियल ग्रंथि
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सूर्य अर्घ्य में क्या-क्या डालते हैं?

सूर्य अर्घ्य की सामग्री: लाल चंदन (रक्त चंदन) + कुमकुम + लाल पुष्प (गुड़हल या कनेर) + अक्षत + काले तिल — सब जल में मिलाकर अर्घ्य दें।

अर्घ्य सामग्रीलाल चंदनगुड़हल पुष्प
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अर्घ्य में तांबे का लोटा क्यों इस्तेमाल करते हैं?

तांबे का लोटा क्यों: शास्त्र = तांबा सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण और परावर्तित करने में सर्वाधिक सक्षम धातु। तांबे के पात्र का उपयोग और दान = आयु, आरोग्य और तेज में वृद्धि।

तांबे का लोटासूर्य ऊर्जाधातु
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मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य कैसे देते हैं?

सूर्य अर्घ्य विधि: उदित सूर्य की ओर मुख → तांबे के लोटे को हृदय-नेत्र से ऊपर उठाएं → धीमी धार से जल पृथ्वी पर गिराएं → दृष्टि जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। तीन बार प्रदक्षिणा → साष्टांग प्रणाम।

सूर्य अर्घ्य विधितांबे का लोटाउदित सूर्य
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सूर्य अर्घ्य — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर सूर्य अर्घ्य श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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सूर्य अर्घ्य को गहराई से समझने का तरीका

सूर्य अर्घ्य प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

9 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।