विस्तृत उत्तर
साधक की दृष्टि उस गिरती हुई जलधारा के मध्य से सूर्य के बिम्ब पर केंद्रित होनी चाहिए।
यह प्रक्रिया क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) का एक प्राचीन स्वरूप है। जलधारा से छनकर आने वाली सूर्य की प्रातःकालीन रश्मियाँ नेत्र ज्योति को बढ़ाती हैं और पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) को सक्रिय कर शरीर की 'सर्कैडियन रिदम' (Circadian Rhythm) को संतुलित करती हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक


