विस्तृत उत्तर
अर्घ्य प्रदान करते समय निम्नलिखित मन्त्रों का सस्वर या मानसिक जप करना चाहिए:
१. सामान्य सवित्र मन्त्र:
ॐ घृणि सूर्याय नमः' — कम से कम 11 बार या 108 बार उच्चारण करें।
२. कालिका पुराण (57.178) का विशिष्ट अर्घ्य मन्त्र:
ॐ नमो विवस्वते ब्रह्मन् भास्वते विष्णुतेजसे। जगत्सवित्रे शुचये सवित्रे कर्मदायिने॥
अर्थ: हे विवस्वान् (सूर्य)! आप दिव्य परब्रह्म हैं, विष्णु के तेज से दीप्तिमान हैं, सम्पूर्ण जगत की उत्पत्ति के कारण हैं, अत्यंत पवित्र हैं, और समस्त प्राणियों को नित्य कर्म में प्रवृत्त करने वाले हैं।
३. स्मृति और देवी भागवत आधारित व्यापक मन्त्र:
एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले, हे तेजोराशि, हे जगत्पति सूर्य! मुझ पर अनुकम्पा करें और मेरी भक्तिपूर्वक दी गई इस अर्घ्य को स्वीकार करें, हे दिवाकर!
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