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विस्तृत उत्तर
स्मृति और देवी भागवत आधारित यह व्यापक मन्त्र:
एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
इसका अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले (सहस्रांशो), हे तेजोराशि (तेज के राशि/भंडार), हे जगत्पति (जगत के स्वामी) सूर्य! मुझ पर अनुकम्पा करें और मेरी भक्तिपूर्वक दी गई इस अर्घ्य को स्वीकार करें, हे दिवाकर (दिन के प्रकाशक)!
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