विस्तृत उत्तर
संकल्प और स्नान के उपरांत सबसे प्रधान अनुष्ठान भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य प्रदान करना है।
अर्घ्य देते समय:
— साधक को उदित होते हुए सूर्य की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए।
— तांबे के पात्र को दोनों हाथों से पकड़कर अपने हृदय और नेत्रों के स्तर से ऊपर उठाना चाहिए।
— जल को अत्यंत धीमी गति से धार बनाकर पृथ्वी पर गिराना चाहिए।
— साधक की दृष्टि उस गिरती हुई जलधारा के मध्य से सूर्य के बिम्ब पर केंद्रित होनी चाहिए।
— यह प्रक्रिया क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) का एक प्राचीन स्वरूप है।
अंत में अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करनी चाहिए और सूर्य देव को साष्टांग या पंचांग प्रणाम करना चाहिए।
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